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वादियों का प्रदेश उत्तराखंड

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शीतल आबोहवा, हरे भरे मैदान और खूबसूरत पहाड़ियां, ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने यहां अपने अनुपम सौंदर्य की छटा दिल खोल कर बिखेरी है। इसीलिए उत्तराखंड में देशी विदेशी पर्यटक अनायास खिंचे चले आते हैं। भारत के राज्यों में उत्तराखंड पर्यटन के लिहाज से अद्वितीय है, राज्यभर में पूरे साल देश-विदेश के सैलानियों का तांता लगा रहता है, यहां पर्यटन स्थलों की भरमार है, प्राकृतिक खूबसूरती है, हरियाली है, पर्वत हैं, झीलें हैं, कलकल करती नदियां हैं।

नैनीताल

नैनीताल की बड़ी विशेषता यहां के ताल हैं, इसी कारण नैनीताल को तालों का शहर भी कहा जाता है। यहां पर कम खर्च में हिल टूरिज्म का भरपूर मजा लिया जा सकता है। काठगोदाम, हल्द्वानी और लालकुआं नैनीताल के करीबी रेलवे स्टेशन हैं। इन स्टेशनों से पर्यटक बस या टैक्सी के द्वारा आसानी से नैनीताल पहुंच सकते हैं। नैनीताल को अंग्रेजों ने हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया था। नैनीताल शहर के बीचों-बीच नैनी झील है, इस झील की बनावट आंखों की तरह की है, यहां पर वोटिंग का मजा लिया जा सकता है। इसी कारण इस को नैनी और शहर को नैनीताल कहा जाता है। काठगोदाम नैनीताल का सब से करीबी रेलवे स्टेशन है, काठगोदाम से नैनीताल के लिए जब आगे बढ़ते हैं तो ज्योलिकोट में चीड़ के घने वन दिखाई पड़ते हैं, यहां से कुछ दूरी पर कौसानी, रानीखेत और जिम कौर्बेट नैशनल पार्क भी पड़ते हैं। ज्योलिकोट कई पहाड़ियों से घिरी हुई जगह है, गर्मियों में नैनीताल में रुकने की जगह नहीं मिलती, ऐसे में जिन लोगों को एकांत पसंद हो वे नैनीताल घूम कर ज्योलिकोट में रुक सकते हैं, यहां पर ठहरने के लिए कई हिल रिजोर्ट हैं, यहां के जंगलों में खूबसूरत पक्षियों के कलरव को सुना जा सकता है। नैनीताल के आसपास कई खूबसूरत जगहें हैं, जहां घूमने का मजा भी लिया जा सकता है।

दर्शनीय स्थल


भीमताल इस की लंबाई 448 मीटर और चैड़ाई 175 मीटर है, भीमताल की गहराई 50 मीटर तक है। भीमताल के 2 कोने, तल्लीताल और मल्लीताल के दोनों कोने सड़क से जुडे़ हैं। नैनीताल से भीमताल की दूरी 22.5 किलोमीटर है।

नौकुचियाताल यह भीमताल से 3 किलोमीटर दूर उत्तरपूर्व की ओर 9 कोनों वाला ताल है। नैनीताल से इसकी दूरी 26 किलोमीटर है। नौकुचियाताल की खासीयत इसके टेढ़े-मेढे़ कोने हैं, ये 9 कोने किसी को एकसाथ दिखाई नहीं देते हैं।
सात ताल यह कुमाऊं इलाके का सब से खूबसूरत ताल है, इतना सुंदर कोई दूसरा ताल नहीं है, इस ताल तक पहुंचने के लिए भीमताल से हो कर रास्ता गुजरता है, भीमताल से इसकी दूरी 4 किलोमीटर है, नैनीताल से यह 21 किलोमीटर दूर स्थित है, सात तालों में नलदमयंती ताल सब से अलग है।


खुर्पाताल यह नैनीताल से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इस ताल का गहरा पानी इसकी सबसे बड़ी सुंदरता है। यहां पर पानी के अंदर छोटी-छोटी मछलियों को तैरते हुए देखा जा सकता है। इनको रूमाल के सहारे पकड़ा भी जा सकता है, खुर्पाताल के साफ और स्थिर पानी में पहाड़ों की सुंदरता को देखा जा सकता है।

रोपवे यह नैनीताल का सब से प्रमुख आकर्षण है। यह स्नोव्यू प्वाइंट और नैनीताल को जोड़ता है। यह मल्लीताल से शुरू होता है, यहां पर 2 ट्राॅलियां हैं जो सवारियों को लेकर एक तरफ से दूसरी तरफ जाती हैं, रोपवे से पूरे नैनीताल की खूबसूरती को देखा जा सकता है। नैनीताल का माल रोड यहां का सब से आधुनिक बाजार है, माॅल रोड पर बहुत सारे होटल, रेस्तरां, दुकानें और बैंक हैं।

कौसानी

कौसानी को भारत की सब से खूबसूरत जगह माना जाता है। कौसानी उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से 53 किलोमीटर उत्तर में बसा है। यह बागेश्वर जिले में आता है, यहां से हिमालय की सुंदर वादियों को देखा जा सकता है। कौसानी पिंगनाथ चोटी पर बसा है, यहां पहुंचने के लिए रेल मार्ग से पहले काठगोदाम आना पड़ता है। यहां से बस या टैक्सी के द्वारा कौसानी पहुंचा जा सकता है। दिल्ली के आनंद विहार बस स्टेशन से कौसानी के लिए बस सेवा मौजूद है। अपने खूबसूरत प्राकृतिक नजारे और आकर्षण के चलते कौसानी घूमने वालों को अपनी ओर खींचती है, बर्फ से ढंकी नंदा देवी चोटी का नजारा यहां से भव्य दिखाई देता है।


दर्शनीय स्थल

कौसानी में घूमने वाली जगह यहां के चाय बागान हैं। यहां आने वाले यहां की चाय की खरीदारी करना नहीं भूलते हैं। यहां के अनासक्ति आश्रम को गांधीजी का आश्रम भी कहा जाता है, यह आश्रम अध्ययन कक्ष और पुस्तकालय देखने वालों को आकर्षित करता है।
पर्यटकों को लुभाता रोचक सैरगाहों से संपन्न ‘लिथुआनिया’ कौसानी से बर्फ से ढके पहाड़ों को भी देखा जा सकता है। यहां से चैखंबा, नीलकंठ, नंदाघुंटी, त्रिशूल, नंदादेवी, नंदाखाट, नंदाकोट और पंचकुली शिखर देखे जा सकते हैं।

मसूरी


मसूरी दुनिया की उन जगहों में गिनी जाती है जहां पर लोग बार-बार जाना चाहते हैं, इसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। मसूरी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 35 किलोमीटर दूर स्थित है। देहरादून तक आने के लिए देश के हर हिस्से से रेल, बस और हवाई जहाज की सुविधा उपलब्ध है। मसूरी हिमालय पर्वतमाला की शिवालिक श्रेणी में आती है, इसके उत्तर में बर्फ से ढके पर्वत दिखते हैं और दक्षिण में खूबसूरत दून घाटी दिखती है।

मुख्य आकर्षण

गन हिल मसूरी के करीब दूसरी ऊंची चोटी पर जाने के लिए रोपवे का मजा घूमने वाले लेते हैं। यहां पैदल रास्ते से भी पहुंचा जा सकता है। यह रास्ता माल रोड पर कचहरी के निकट से जाता है। यहां पहुंचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है, रोपवे की लंबाई केवल 400 मीटर है। गन हिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला देखा जा सकता है।

म्युनिसिपल गार्डन मसूरी का कंपनी गार्डन आजादी से पहले तक बोटैनिकल गार्डन कहलाता था। कंपनी गार्डन का निर्माण भूवैज्ञानिक डा. एच फाकनर लोगी ने किया था। 1842 के आसपास उन्होंने इस जगह को सुंदर उद्यान में बदल दिया। इसे कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन कहा जाने लगा।

कैमल बैक रोड कुल 3 किलोमीटर लंबी यह रोड रिंक हौल के समीप कुलीर बाजार से शुरू होती है। यह लाइब्रेरी बाजार पर जा कर खत्म होती है। इस सड़क पर पैदल चलना या घुड़सवारी करना अच्छा लगता है। सूर्यास्त का दृश्य बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।

कैंपटी प्रपात यमुनोत्तरी रोड पर मसूरी से 15 किलोमीटर दूर 4500 फुट की ऊंचाई पर स्थित कैंपटी प्रपात मसूरी की सब से सुंदर जगह है। यह मसूरी का सबसे बड़ा और खूबसूरत झरना है, यह चारों ओर ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। कैंपटी प्रपात में नहाने के बाद पर्यटक अपने को तरोताजा महसूस करते हैं।

मसूरी झील मसूरी- देहरादून रोड पर मूसरी झील के नाम से नया पर्यटन स्थल बनाया गया है। यह मसूरी से 6 किलोमीटर दूर है, पैडल बोट से झील में घूमने का आनंद लिया जा सकता है।

वाम चेतना केंद्र टिहरी बाईपास रोड पर लगभग 2 किलोमीटर दूर एक नया पिकनिक स्पाॅट बनाया गया है। यहां तक पैदल या टैक्सी से पहुंचा जा सकता है, इस पार्क में वन्यजीव जैसे घुरार, कंणकर, हिमालयी मोर और मोनल आदि रहते हैं।

दर्शनीय स्थल

यमुना ब्रिज मसूरी से 27 किलोमीटर चकराता-बारकोट रोड पर यमुना ब्रिज स्थित है, यह फिशिंग के लिए सबसे अच्छी जगह है। परमिट ले कर यहां फिशिंग की जा सकती है।

चंबा मसूरी से लगभग 56 किलोेमीटर दूर चंबा स्थित है, इसको टिहरी भी कहते हैं, यहां पहुंचने के लिए लोगों को जिस सड़क से हो कर गुजरना पड़ता है वह फलों के बागानों से घिरी है। वसंत के मौसम में फलों से लदे वृक्ष देखते ही बनते हैं।

ट्रैकिंग का मजा

मसूरी-नागटिब्बा मसूरी से नागटिब्बा मार्ग की दूरी लगभग 62 किलोमीटर है, नागटिब्बा से हिमालय की चोटी के शानदार दृश्य को देखा जा सकता है। यहां से पंथवाडी, नैनबाग और कैंपटी फाॅल की दूरी को कवर किया जा सकता है।
मसूरी-धनौल्टी 26 किलोमीटर लंबे मसूरी धनौल्टी मार्ग पर हिमालय की चोटियों और घाटी के कुछ दिल दहला देने वाले दृश्य दिखाई देते हैं।

अल्मोड़ा

यह उत्तराखंड का सब से खास शहर है, हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से बस या टैक्सी से यहां पहुंचा जा सकता है।

दर्शनीय स्थल

भवाली के रास्ते से जब अल्मोड़ा के लिए जाया जाता है तो रास्ते में कैंची जगह पड़ती है, यह भवाली से 7 किलोमीटर की दूरी पर है। प्रकृति का आनंद लेने वाले पर्यटकों के रुकने के लिए यहां पर धर्मशालाएं बनी हैं। कैंची से आगे गरमपानी नामक छोटी सी जगह है, यहां पर्यटक खानेपीने के लिए रुकते हैं। यहां का पहाड़ी खाना घूमने वालों को खूब पसंद आता है। इससे कुछ आगे बढ़ने पर खैरना आता है, खैरना मछली के शिकार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। अल्मोड़ा के किले पर्यटकों को बहुत अच्छे लगते हैं, कालीमठ अल्मोड़ा से 5 किलोमीटर दूर है, इसके एक ओर से हिमालय दिखाई देता है तो दूसरी ओर अल्मोड़ा शहर दिखता है। यहां घंटों बैठ कर प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा जा सकता है।
अल्मोड़ा से 3 किलोमीटर दूर सिमतोला पिकनिक स्पाॅट है। अल्मोड़ा के राजकीय संग्रहालय के साथ ही साथ यहां का ब्राइट ऐंड काॅर्नर भी घूमने वाली खास जगह है। यहां से उगते और डूबते सूरज को देखना अद्भुत लगता है, यह जगह बस स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। लाल बाजार में ऊनी वस्त्रों की खरीददारी की जा सकती है।

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