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हरियाली का बिछौना आपकी बगिया में

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घर का बगीचा एक हरे कैनवस की भांति होता है जिस के ऊपर आप रुचि के अनुसार रंग बिखेर सकते हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने भी यह स्वीकारा है कि हमारे आसपास पेड़-पौधों व हरियाली का मानव मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, सुबह-शाम घास पर नंगे पांव चलने से प्राकृतिक रूप से ऐक्यूप्रैशर होता है और आंखों को भी शीतलता प्राप्त होती है घास की विशेषता यह है कि यह वर्षभर हरा-भरा रहने के साथ बगीचे का स्थायी अंग बन जाता है। जिसे बार-बार लगाने की आवश्यकता नहीं होती।

घास का चुनाव
घास का चुनाव करते समय वातावरण, तापमान, आर्द्रता इत्यादि की जानकारी अवश्य लें। गरम स्थानों पर उगाई जाने वाली घास जहां गरम, आर्द्र मौसम को सहन कर सकती है वहीं ठंडे स्थानों पर लगाई जाने वाली घास अत्यंत कम तापमान व पाले की मार को सहन करने की क्षमता रखती है। अगर भूमि काफी है तो दूब घास की उन्नत किस्मों का प्रयोग करें। छोटे बगीचे में गद्देदार घास, कोरियन घास यानी जौयशिया जैपोनिका का प्रयोग कर सकते हैं।
बगीचे इसी प्रकार ठंडे इलाकों में जहां तापमान शून्य से कम चला जाता है और पाले की मार भी अधिक होती है वहां बंगाल बैंट यानी एगरोस्टिस की विभिन्न प्रजातियां बहुत अच्छा गलीचा बनाती हैं। कैंटकी ब्लू घास राई घास यानी भी ठंडे क्षेत्रों में उपयुक्त पाई गई हैं।

जमीन की तैयारी
घास लगाने के लिए धूपदार जगह का चुनाव करें। एक बार घास लगाने पर वह वर्षों तक आप के आंगन की खूबसूरती बढ़ाएगी। इसलिए जमीन की तैयारी पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है। चूंकि घास जमीन की सतह पर चारों ओर फैलती है और जड़ें बहुत गहरी नहीं जातीं इसलिए ऊपरी 10-12 इंच की मिट्टी का भुरभुरा होना जरूरी है। इस मिट्टी को भली प्रकार छान लें और कंकड़-पत्थर निकाल दें, अब मिश्रण तैयार करें, इसमें 2 भाग छनी हुई मिट्टी, 1 भाग छनी हुई रेत व 1 भाग छनी हुई गोबर की खाद मिलाएं। इस मिश्रण को 15-20 दिन तक धूप लगाएं व 2 दिन के अंतराल पर उलट-पलट करें, मिश्रण को गीला कर के पौलिथीन शीट से इस प्रकार ढकें कि हवा कहीं से भी अंदर न जा सके। इसे 25-30 दिन तक बिना छेड़े रहने दें, पाॅलिथीन से मिश्रण का तापमान बढ़ेगा और कीट, बीमारियां व खरपतवार के बीज नष्ट हो जाएंगे। इस प्रकार तैयार किया गया मिश्रण घास लगाने के लिए सर्वोत्तम है, अब इस मिश्रण को समान सतह बना कर फैलाएं, मिश्रण फैलाते समय ग्रेडिएंट का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि पानी निकासी का उचित प्रबंधन हो। वैसे तो घास समतल भूमि पर लगाया जाता है परंतु इसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए छोटे-छोटे टीले यानी पहाड़ भी बनाए जा सकते हैं।

लगाने का समय
शुष्क व गरम इलाकों में बरसात के आरंभ में घास लगाएं, इसमें घास के पौधे शुरुआती जड़ें अच्छी तरह पकड़ेंगे और वातावरण में नमी की मात्रा अधिक होने से घास का फैलाव भी शीघ्रता से होगा। ठंडे इलाकों में फरवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त या सितम्बर, अक्तूबर में भी लगाया जा सकता है। अगर सिंचाई करने की पर्याप्त सुविधा हो तो सर्द महीनों को छोड़ कर लगभग पूरे वर्ष घास लगा सकते हैं।

लौन कैसे लगाएं
घास लगाने के 2 प्रमुख तरीके हैं, बीज से व पौध से, जब घास बीज से लगाना चाहें तो बीज की मात्रा का ज्ञान होना चाहिए। घास की कुछ प्रजातियों के बीज अत्यंत छोटे होते हैं ऐसे बीजों को समान मात्रा में रेत में मिलाकर बोया जाता है। मिट्टी बराबर भागों में विभाजित करें, फिर उसमें बीज बराबर हिस्सों में छिड़काव विधि द्वारा डालें, इससे पूरे बगीचे में बराबर बीज डलेगा। बीज डालने के बाद उस के ऊपर मिट्टी मिश्रण की 0.5 से 1.0 सैंटीमीटर ऊंची सतह बिछाएं। ऊपर बीज डाल कर सीधे सिंचाई न करें, इसपर जूट या बोरी या सूखी घास बिछा कर फौआरे से सिंचाई करें।
बीज बोने के बाद मिश्रण में नमी खत्म न होने दें, आवश्यकतानुसार फौआरे या स्प्रिंकलर से पानी दें, लगभग 12-15 दिन बाद जब बीज उगना शुरू हो जाए तो जूट हटा दें। बहुत बड़ा लाॅन हो तो बिना जूट से ढके केवल स्प्रिंकलर से भी पानी दे सकते हैं। पौध से घास लगाने के लिए पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है, फिर जड़दार घास को लगाया जाता है।
और भी कई तरीके हैं परंतु सब से आधुनिकतम तरीका है टर्फिंग, इसमें विभिन्न आकार के टुकड़ों (टाइलों) में बना बनाया उपलब्ध रहता है, सबसे पहले मिश्रण मनचाहे आकार में बिछा लें, अब इस भूमि को नाप कर, इसी के आकार का टुकड़ा नर्सरी से ले आएं। यदि आकार बड़ा है तो घास टाइलों के रूप में कटवा कर लाएं। इन टाइलों को ईंटों की चिनाई की तरह भूमि पर बिछाएं। खूब पानी दें। इस प्रकार की लाॅन घास लगभग सभी नर्सरियों में 90-150 रुपए प्रति किलोग्राम के मूल्य पर उपलब्ध रहती है। सबसे आसान व शीघ्रतम तरीका है। इस तरह आप रातोंरात घर के आंगन में हराभरा लाॅन लगा सकते हैं।

देखभाल
खूबसूरत लाॅन बगीचे की जान और घर की शान है, यदि लाॅन की घास ऊंची-नीची, ज्यादा बढ़ी या खरपतवार से भरपूर है तो बगिया की सुंदरता नष्ट हो जाती है।

मोइंग (घास काटना)
घास की सतह को समतल व हराभरा रखने के लिए घास को समय-समय पर काटना आवश्यक है। मोइंग करने से घास में नई कोंपलें निकलती हैं। जिस से लाॅन घना बनता है और शीघ्रता से एक हरे गलीचे की तरह फैलता है। मोइंग करते समय घास की ऊंचाई 5-7 सैंटीमीटर रखनी चाहिए। अधिक छोटी करने पर घास की जड़ें कमजोर पड़ सकती हैं और घास पर तीव्र धूप व पाले का असर भी जल्द पड़ता है।

रोलिंग
समतल हरियाली प्राप्त करने के लिए रोलिंग करना जरूरी है। रोलिंग का काम बरसात का मौसम शुरू होने पर शुरू करें, रोलिंग में घास के तने, जो जमीन से ऊपर उठे हों, को रोलर के दबाव से मिट्टी के नजदीक पहुंचा दिया जाता है।

सिंचाई
नए लगाए लाॅन में तब तक सिंचाई करें जब तक जड़ें मिट्टी न पकड़ लें। वैसे सालभर आमतौर पर तापमान और वातावरण की नमी के अनुसार सिंचाई करें। जब घास अपनी जड़ें पकड़ ले तब लौन में समुचित पानी दें और उस के बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ा दें।

खाद व उर्वरक
हरियाली कायम रखने के लिए पोषक तत्त्वों में से नाइट्रोजन सब से जरूरी है। इसके लिए रासायनिक खादों में 15 भाग अमोनियम सल्फेट, 5 भाग सुपर फास्फेट व 2 भाग पोटैशियम सल्फेट का मिश्रण बनाएं। अब इस मिश्रण को 2.5 किलोग्राम प्रति 100 वर्ग मीटर की दर से छिड़काव विधि द्वारा वर्ष में 2 बार डालें।

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