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सम्मान सेवा, साधना और समर्पण का ओजस्विनी अलंकरण 2017

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ओजस्वी अलंकरण समारोह अभी तक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किए जाते रहे हैं। वर्ष 2000 में सहस्राब्दी अलंकरण दिल्ली में आयोजित किया गया था। उससे पहले और उसके बाद लगभग 18 अलंकरण समारोह भोपाल में आयोजित किए गए। किंतु इस बार ओजस्विनी अलंकरण समारोह के लिए बुंदेली महोत्सव का समय तय किया गया और 20 अप्रैल को बुंदेलखंड के प्रमुख शहर दमोह में अलंकरण समारोह आयोजित हुआ। दमोह में आयोजन करने के पीछे बुंदेलखंड की जनता को ओजस्विनी के प्रयासों और गए कार्यों का परिचय देना तो था ही, ओजस्विनी अलंकरण को भी नया मंच प्रदान करना एक उद्देश्य था।


दमोह जिले में ही नहीं बल्कि समूचे बुंदेलखंड में बुंदेली महोत्सव ने अपनी अलग पहचान बनाई है। जनता के बीच यह महोत्सव अत्यंत लोकप्रिय है। यह सांस्कृतिक उत्सव होने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के प्रदर्शन एवं व्यापार की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसीलिए जब दमोह शहर का चयन किया गया तो उस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति प्रदान कर दी गई। 20 अप्रैल को मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्राी शिवराज सिंह चैहान अत्यंत व्यस्त थे। सुबह उन्होंने लगभग अपना कार्यक्रम रद्द ही कर डाला था, किंतु ओजस्विनी समूह की चेयरपर्सन डाॅक्टर सुधा मलैया के विशेष आग्रह पर अत्यंत व्यस्तता के बीच मुख्यमंत्राी शिवराज सिंह चैहान दमोह पहुंचे। हेलीपैड पर स्वागत उपरांत माननीय मुख्यमंत्राी, ब्रहमर्षि सुभाष पात्राी, माननीय जयंत मलैया, माननीय गोपाल भार्गव, अभिनेता रजत सक्सेना एवं डाॅक्टर सुधा मलैया की उपस्थिति में ओजस्विनी नगर स्थित जय भारत पिरामिड ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया गया। पिरामिड आध्यात्मिक ऊर्जा को केंद्रित करने का स्थल है। इस पिरामिड को माननीय मुख्यमंत्राी श्री पात्राी जी स्वर्ण माला जी शरद रेनू पथरिया एवं हटा विधायक सहित सभी विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में लोकार्पित किया गया।

पिरामिड के उद्घाटन के उपरांत ब्रह्मर्षि पात्राीजी ने 4 मिनट तक बांसुरी बजाकर ध्यान कराया। ध्यान में तल्लीन ओजस्विनी इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्रों एवं उनके गुरुओं के लिए यह सर्वथा नवीन और सुखदाई अनुभव था। यह पिरामिड 3600 वर्ग फीट में बना हुआ है। इसकी ऊंचाई 51 फीट है। इसके बीच में किंग्स एवम क्वीन चेंबर हैं। समीप ही ओजस मुक्ताकाश नाट्यशाला का उद्घाटन भी विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। जिसमें ओजस्विनी इंजीनियरिंग काॅलेज के एल्युमिनाई छात्रा थे। कई छात्रों ने अपने अनुभव सुनाए। उन्होंने बताया कि उन्हें बेहतर भविष्य का रास्ता ओजस्विनी इंजीनियरिंग काॅलेज से ही मिला। बहुत से छात्रा देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवारत हैं। एक छात्रा रेलवे में मैकेनिकल इंजीनियर है।
पिरामिड एवं मुक्ताकाश का अवलोकन करने के बाद सभी अतिथि गण दमोह के तहसील मैदान में चल रहे बुंदेली महोत्सव में पहुंचे। बुंदेली महोत्सव में अपार भीड़ मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्राी श्री शिवराज सिंह चैहान का इंतजार कर रही थी। वे आए थे अपने प्रदेश के मुखिया को सुनने और ओजस्वी अलंकरण समारोह के साक्षी बनने के लिए। जो पहली बार उनके शहर में आयोजित किया जा रहा था। कुछ देर के लिए मुख्यमंत्राी के पहुंचने पर भीड़ अनियंत्रित सी हो गई, लेकिन पुलिस की मुस्तैद व्यवस्था होने के कारण स्थिति को संभाल लिया गया।


सबसे पहले अतिथियों ने बुंदेली दमोह महोत्सव में महिला सशक्तिकरण मेले का उद्घाटन किया, जिसके अंतर्गत देश और प्रदेश की महिलाओं से संबंधित सभी योजनाओं के ऊपर महिलाओं ने विभिन्न वेशभूषाओं में नुक्कड़ नाटक के रूप में प्रदर्शन किया। जननी सुरक्षा एक्सप्रेस, लाड़ली लक्ष्मी योजना, मेधावी छात्रा योजना, सामूहिक कन्यादान योजना, जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत योजना, गांव की बेटी योजना, ग्रीन दमोह योजना जैसी योजनाओं पर सभी प्रतिभागियों ने बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्राी भाव विभोर और अभिभूत हो गए।
इसी के साथ प्रारंभ हुआ दमोह में पहला किंतु समग्र रूप से 20वां ओजस्विनी अलंकरण। दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम गायन के उपरांत समस्त विशिष्ट अतिथियों और सम्मानिताओं का मंच पर आव्हान किया गया। इस अवसर पर फिल्म जगत की जानी मानी हस्ती एवं मध्य प्रदेश के वित्त मंत्राी माननीय जयंत मलैया के अभिन्न मित्रा श्री शरद सक्सेना एवं कायनेटिक समूह की चेयरपर्सन श्रीमती सुलज्जा फिरौदिया भी उपस्थित थे। अतिथियों ने ब्रह्मर्षि सुभाष पात्राी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्णमाला पात्राी को ओजस्विनी अर्धनारीश्वर सम्मान, साध्वी ज्ञानेश्वरी देवी को ओजस्विनी शिखर सेवा अलंकरण, राष्ट्र सेविका समिति की शरद रेणु जी को ओजस्विनी शीर्ष अलंकरण एवं नृत्यांगना शमा भाटे जी को ओजस्विनी कलाश्री अलंकरण से सम्मानित किया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्राी श्री शिवराज सिंह चैहान ने अपने भाषण में डाॅक्टर सुधा मलैया एवं ओजस्विनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा ‘सुधा जी ने जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में ओजस्विनी का प्रकाशन निरंतर बनाए रखा है वह अभिनंदनीय और सराहनीय है। सुधा जी बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं एवं महिलाओं के लिए उन्होंने अद्भुत कार्य किया है। महिला सशक्तिकरण मेले में जिन प्रकार से महिलाओं ने प्रस्तुति दी है वह अत्यंत सराहनीय है। किंतु मुझे महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुधा जी की बातों का दर्द समझ में आता है। आज सच में हमारी बहू-बेटियां अपने घरों में ही सुरक्षित नहीं हैं। बाहर की तो बात क्या करें। मैं उनकी चिंता से सहमति व्यक्त करते हुए कहना चाहता हँू कि महिलाओं की सुरक्षा के व्यापक प्रबंधन होने चाहिए। जहां हम कन्याओं को पूजते हैं वहां हमें उनका सम्मान भी करना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने प्रदेश में रहते हुए महिलाओं के दुख दर्द को समझने का हर संभव प्रयास किया है। उनकी पीड़ाओं को कम करने, उनकी समस्याओं का समाधान करने की पूरी कोशिश की है। महिलाएं हर क्षेत्रा में आगे बढ़ी हैं और यहां जो स्त्रिायां बैठी हैं वह भी संघर्ष के उपरांत ही यहाँ तक पहुँची हैं। ओजस्विनी ने जिस तरह महिलाओं के सम्मान की परंपरा डाली है वह प्रशंसनीय है।’ मुख्यमंत्राी महोदय ने मलैया परिवार की दोनों बहुओं पूजा एवं रति मलैया की प्रशंसा करते हुए कहा दोनों बेटियां सुधा जी के साथ प्राणपण से जुड़ जाती हैं।
इस अवसर पर माननीय गोपाल भार्गव ने डाॅक्टर सुधा मलैया की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह सही मायने में शक्तिरूपा हैं और श्री जयंत मलैया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। मलैया जी की सफलता के पीछे सुधा मलैया जी का व्यापक योगदान है। अभिनेता रजत सक्सेना ने भी ओजस्विनी अलंकरण को स्त्राी सम्मान की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए महिलाओं की लगातार बढ़ती ताकत और संघर्ष क्षमता की सराहना की।


इससे पूर्व अपने स्वागत भाषण में ओजस्विनी पत्रिका की प्रधान संपादक डाॅक्टर सुधा मलैया ने ओजस्विनी की 25 वर्षीय यात्रा का वर्णन करते हुए कहा, ‘स्त्राी के सामने अनेक चुनौतियां हैं, किंतु फिर भी वह एवरेस्ट की ऊंचाई से लेकर समुद्र की गहराई तक हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। वह जल-थल-नभ सब जगह है और उसकी उपलब्धियां कम नहीं हैं। लेकिन दिनों दिन बढ़ती स्त्राी प्रताड़ना और अत्याचार की घटनाओं ने कहीं न कहीं स्त्राी को दुखी किया है। उनके मान-सम्मान को आघात पहुंचाया है। पर इसके बाद भी देश और प्रदेश में सत्तासीन सरकारें स्त्रिायों के इस दुख को कम करने की कोशिश कर रही हैं।’ डाॅक्टर मलैया ने प्रदेश और देश स्तर पर चल रही विभिन्न योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि स्त्राी को उसका उचित स्थान दिलाने के लिए देश और प्रदेश का नेतृत्व पूरे प्रयास कर रहा है और इन प्रयासों को सफलता मिली है। उन्होंने सम्मानिताओं के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में अपना स्थान बनाने वाली यह ओजस्विनियां स्वयं प्रकाशित होती हैं और दूसरों को भी प्रकाशित कर रही हैं। इन्होंने सारे देश को जागृत किया है।
इस अवसर पर ओजस्विनी में प्रकाशित डाॅ सुधा मलैया के सम्पादकीय लेखों का संकलन ‘श्रीजा’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। इसके उपरांत प्रख्यात कत्थक नृत्यांगना शमा भाटे के निर्देशन में मुंबई से आए उनके समूह ने अद्भुत नृत्य प्रस्तुति दी जिसे दर्शक सांस रोक कर देखते रहे। इस प्रकार अनेक सुनहरी यादों के साथ ओजस्विनी का यह अविस्मरणीय ओजस्विनी अलंकरण समारोह संपन्न हुआ।

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