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छत्तीसगढ़ राज्य

छत्तीसगढ़: 3 हजार हड़ताली नर्सों की एस्मा कानून के तहत गिरफ्तारी

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छत्तीसगढ़ में हड़ताल पर गई नर्सों की गिरफ्तारी शुरू हो गई है. शुक्रवार को लगभग तीन हजार महिला नर्सों को राज्य के अलग-अलग जिलों में गिरफ्तार किया गया है. अपने वेतन भत्तों में बढ़ोतरी और नौकरी पक्की करने की मांग को लेकर राज्य के सरकारी अस्पतालों की हजारों नर्से हड़ताल पर चली गई थीं.

वहीं राज्य सरकार ने हड़ताल के लंबी खिंच जाने के चलते एस्मा लगा दिया था. इसके बाद भी हड़ताली नर्सें काम पर नहीं लौटी. नतीजतन राज्य सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरू कर दी.

राज्य के स्वास्थ विभाग ने हड़ताली नर्सों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई. इसके पहले नर्सों के संगठन और स्वास्थ विभाग के आला अफसरों के बीच मांगों को लेकर बातचीत हुई, लेकिन यह वार्ता विफल रही. हड़ताली नर्सों ने अपनी मांगों को जायज ठहराया.

दूसरी ओर शहरों से लेकर गांव-कस्बों तक के सरकारी अस्पतालों में नर्सों की अनुपस्थिति के चलते सैकड़ों मरीजों की जान पर बन आई है. दरअसल, डॉक्टरों को पहले से तय कई ऑपरेशन टालने पड़े हैं. क्योंकि अस्पताल में नर्स ही नहीं है. ऐसे में किसी भी मरीज के ऑपरेशन का जोखिम डॉक्टर नहीं उठा रहे हैं. दो हफ्तों से नर्सों के अस्पताल में नहीं आने के चलते कई जरूरी सेवाएं भी ठप हो गई हैं. सरकारी अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सेवा ही संचालित हो रही है. वो भी ज्यादातर ट्रेनी नर्सों के भरोसे.

क्या है नर्सों की मांग?

राज्य के सभी 27 जिलों में नर्सों ने राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. ये नर्से अपने कार्य के अनुरूप बढ़े हुए वेतन भत्तों की मांग कर रही हैं. उनकी यह भी मांग है कि कई सालों से काम करने के बावजूद उनकी नौकरी नियमित नहीं की गई है. यही नहीं उन्हें कोई सरकारी सुविधा भी नहीं मिल रही है. हड़ताली नर्सों के मुताबिक, उनके संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार राज्य की बीजेपी सरकार को अल्टीमेटम भी दिया था. स्वास्थ विभाग के अफसरों को अपनी मजबूरियां भी बताई थी, लेकिन सराकार ने कोई कदम नहीं उठाया.

नर्सों ने सरकार पर लगाया आरोप

उनका आरोप है कि बीजेपी सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है. सरकारी अस्पतालों में उनका सिर्फ शोषण ही हो रहा है. वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर की दलील है कि हड़ताली नर्सों की मांगों पर समुचित विचार करने के लिए सरकार तैयार है. बशर्ते नर्स अस्पताल में वापस काम पर लौटें.

वहीं नर्सों की दलील है कि सरकार चाहे उन्हें गिरफ्तार करे वे अपनी मांगें मनवाए बिना काम पर वापस नहीं लौटेंगी. हालांकि, हड़ताली नर्सों पर एस्मा लगाए जाने के बावजूद नर्सों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. उनके मनोबल पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. लिहाजा इस आंदोलन को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा तमाम हड़ताली नर्सों की बर्खास्तगी की तैयारी में है. नर्सों को चेतावनी दी जा रही है कि वो यदि काम पर जल्द नहीं लौटीं तो उन्हें बर्खास्त कर उनके पद पर नई नियुक्ति कर दी जाएगी.

फिलहाल तीन हजार के लगभग नर्सों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हड़ताली नर्सों को जेल में डालना शुरू कर दिया है. उन पर एस्मा कानून के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. हालांकि इन सब के बावजूद हड़ताली नर्सों के हौसले बुलंद है. वो जेल जाने से बिल्कुल भी नहीं डर रही हैं.

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