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शिक्षा

जब रवींद्रनाथ टैगोर ने लौटा दी थी ‘नाइट हुड’ की उपाधि!

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आज से करीब 99 साल पहले आज ही के दिन भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ नाथ टैगोर ने अंग्रेजी हुकुमत का विरोध करते हुए अपनी ‘सर’ की उपाधि वापस लौटा दी थी. उन्होंने यह उपाधि विश्व के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक जलियांवाला कांड (1919) की घोर निंदा करते हुए लौटाई थी.

बता दें कि उन्हें साल 1915 में ब्रिटिश प्रशासन की ओर से ‘नाइट हुड’ की उपाधि दी थी. उस दौरान जिस शख्स के पास नाइट हुड की उपाधि होती थी, उसके नाम के साथ सर लगाया जाता था. रवींद्रनाथ टैगोर ने हत्याकांड की वजह से अंग्रेजों के सम्मान को वापस लौटा दिया था. इससे पहले भी 16 अक्टूबर 1905 को रवीन्द्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में कोलकाता में मनाए गए रक्षाबंधन उत्सव से ‘बंग-भंग आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी. इसी आंदोलन ने भारत में स्वदेशी आंदोलन का सूत्रपात किया.

जलियावाला बाग हत्याकांड

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पर्व पर पंजाब में अमृतसर के जलियांवाला बाग में इस दिन ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हजारों लोगों को घायल कर दिया था.  इस घटना ने भारत के इतिहास की धारा को बदल कर रख दिया. अंग्रेज अफसर ब्रिगेडियर जनरल डायर के आदेश पर 10 मिनट तक 1650 राउंड गोलिया बरसाई गईं थी, दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं.

रवींद्रनाथ टैगोर

गुरुदेव रवीद्रनाथ टैगोर का जन्म साल 1861 को 7 मई को हुआ था. उनकी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई.उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे. वे चाहते थे कि रवीन्द्रनाथ बडे होकर बैरिस्टर बने. उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की लेकिन साल 1880 में बिना डिग्री लिए वापस आ गए. बचपन से ही उनका रुझान कविता, छन्द और कहानियां लिखने में था. उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी. 1877 में वह 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई. 1921 में शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल में विश्व भारतीय यूनिवर्सिटी की नींव रखी.

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