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ओजस्विनी व्यूज

प्रशासनिक शक्ति ही नहीं आत्मशक्ति से भी सम्पन्न हों

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प्रशासनिक सेवा में बहुत कुछ करने की सम्भावनाएँ हैं। स्वतंत्रा रूप से निर्णय लेने का अधिकार अधिक है और निर्णय लेने का अधिकार ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है। स्त्राी हो या पुरुष बार-बार यह बात उठती रही है। अनेक मंचों से। किसी न किसी रूप में। स्त्राी से सम्बंधित विषय कोई भी हो, चाहे मनचाही शिक्षा पाने का हो, कॅरियर के चयन का हो, जीवनसाथी के चयन का हो, महत्वाकांक्षाओं को मूर्त देने का हो, ईश्वर प्रदत्त कला अथवा हुनर को परवान चढ़ाने का हो, मर्जी से कपड़े पहनने का, अपनी रुचि-पसंद का भोजन बनाने का हो या अधिकार अपने शरीर का हो। वास्तविकता कुछ और ही है। जन्म से मृत्यु तक महिला के बारे में सारे निर्णय किसी और के हाथ में रहते आये हैं और अब तो वह जन्म ले या न ले, यह भी कोई और ही तय करता है। प्रशासनिक सेवाओं में हों या राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य, कभी न कभी इसी रास्ते से गुजरती हैं।
यह पहला मौका है जब भारत सरकार में 11 विभागों में महिलाएं सचिव हैं और उनमें से एक रेवा नैयर केबिनेट सचिव पद पाने की अधिकारी थीं। ये सब सर्वशक्ति सम्पन्न हैं। देश के बारे में देश की महिलाओं के बारे में। उनके हित में बहुत सारे निर्णय लेने परियोजनाओं का कार्य निश्चित रूप से करने में। यह क्षमता दूसरी सारी महिलाएँ भी किस प्रकार प्राप्त करें और बढ़ायें इस पर विचार करने की आवश्यकता है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए बहुत सारी योजनाएँ हैं, आरक्षण हैं, कोचिंग हैं लेकिन महिलाओं के लिए कोई कोचिंग प्रशिक्षण संस्थान नहीं है। जितनी भी महिलाएं प्रशासनिक सेवाओं में हैं उनके साथ कोई समस्या नहीं होगी, यह नहीं कहा जा सकता। अन्य कामकाजी महिलाएँ जिन समस्याओं का सामना करती हैं उनका सामना इन्हें भी करना पड़ सकता है। लेकिन अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, लगन के बल पर ये महिलाएँ जहाँ भी रहीं, जिस पद पर रहीं, अधिकांश ने उसके साथ न्याय किया। महिलाओं के हित में कितना कर पाईं, यह शोध का विषय है। ये सब महिलाएँ विभिन्न वर्गों, संघर्षों, पारिवारिक पृष्ठभूमि से आयीं, अपनी योग्यता और क्षमता के बल पर आगे बढ़ीं और अपने आकाश का विस्तार किया, अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने के सूत्रा अपने हाथ में रखे और इस देश की अनेक महिलाओं को ऊँचाईयों तक पहुँचाने में सहयोग किया।

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