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ओजस्विनी व्यूज

जनादेश यात्राएँ

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भाजपा की जनादेश यात्राएँ केवल यात्राएँ नहीं थीं, वो तो भाजपा के अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े थे जो चार दिशाओं से चलकर भारत के हृदय स्थल में आकर मिले। मध्यप्रदेश से ही यज्ञ प्रारम्भ हुआ इसी भूमि पर इस यज्ञ का समापन होगा। सबसे अन्तिम मतदान यहीं होगा। जनादेश यात्रा की अभूतपूर्व सफलता भाजपा के चुनावी अध्वमेघ की सफलता सिद्ध होगी मेरा विश्वास है। यही कारण है कि सारे राजनीतिक दलों में हड़कम्प मच गई है। कोशिश है कि चुनाव टल जाये।
अतः सावधान रहना होगा। एक ओर दंगे भड़काने की, शान्ति भंग करने की पुरजोर कोशिश है, दूसरी ओर ढाँचे के प्रकरण को लेकर भाजपा नेताओं को पुनः गिरफ्तार करने की कोशिश है। कौन है जो मुसलमानों को फिर से चारा डाला जा रहा है (डालने की कोशिश में है)? कौन है जो राव के बेटे व राजेश पायलट, ईमाम बुखारी के तलवे चाटने जामा मस्जिद के चक्कर काटने लगे हैं? कौन है अर्जुन सिंह? अर्जुन सिंह उर्दू विश्वविद्यालय खुलवायेंगे, राजनीति से धर्म को निकालने की बात करते हैं और धर्म के नाम पर देश में साम्प्रदायिकता के नवीन गढ़ों का निर्माण करना चाहते हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय काफी नहीं था जिसमें भारत के खिलाफ साजिशें और पाकिस्तान के गुण गाये जाते हैं। राव अयोध्या में राजेश पायलट से चुपचाप संगीनों के साये में मस्जिद बनाने का विस्फोटक खेल खेला जा रहा है। अधिग्रहित भूमि में मजार बनवाना, सहमत जैसी संस्थाओं को भड़कीले पोस्टर लगवाने की इजाजत देना, किस साजिश की ओर इशारे करता है।
इस देश की सारी सर्वोच्च संस्थाओं की अवमानना करने में यदि कोई व्यक्ति और दल अग्रणी रहा है तो वह केवल नरसिंहराव तथा कांगे्रस है। रामास्वामी प्रकरण में संसद का अपमान और अपने ही दल की किरकिरी करवाना स्वयं महाभियोग प्रस्ताव लाना और स्वयं वोटिंग से हट जाना, सीबीआई द्वारा आकस्मिक रूप से हर्षद मेहता तथा राव के एक करोड़ प्रकरण दफ्तरे दाखिल करना अपनी सारी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर लात मातर है। अभी जब संसदीय समिति कार्यरत है उसका निर्णय अभी आना बाकी है ऐसे में सीबीआई द्वारा इस प्रकार की कार्यवाही शंकाओं से परे नहीं है। देश की कौनसी संस्था है जिसको कांगे्रस ने अपमानित नहीं किया है।
मुम्बई मद्रास के बम विस्फोटों पर इस देश के धर्म निरपेक्षतावादियों को चिन्ता नहीं हुई। न ही माँग की उन्होंने मेमन बन्धुओं को तत्काल पकड़ने की। नहीं हुआ साहस किसी का कि खुलेआम इस देश के दुश्मनों को पहचाने। उनकी सच्ची तस्वीर जनता के सामने रखे। कौन हैं इस देश के दुश्मन और कौन हैं देशभक्त। डोडा में निरपराध हिन्दू बस यात्रियों की हत्या के प्रसंग में केन्द्र सरकार की असहनीय चुप्पी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आगे घुटने टेकने की नीति, चीनी सीमा पर फौजें कम करना, हजारों वर्ग मील भूमि चीन को देने पर समझौता करना, पाकिस्तानी तैयारियों के बावजूद परमाणु बम नहीं बनाने का घिघियाता आश्वासन देना, कर्जे का बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ाते जाना इस देश को कहाँ ले जायेगा, यह आपको सोचना है।
धर्मनिरपेक्षता के विकृत रूप व राष्ट्रवाद में अन्तर स्थापित करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीयता क्या है? क्या तिरंगा केवल तीन रंग के टुकड़ों का जोड़ है या राष्ट्रगीत कुछ शब्दों का जोड़ है। यह तो वह भावना है जो मन में खुशबू की तरह वैसे ही बैठे रहती है जैसे माँ अपनी सन्तान के लिये अकारण प्यार करती है। उत्कट राष्ट्रीयता के बगैर कोई भी राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता और न ही कोई नागरिक अपना चरित्रा निर्माण कर सकता है। जापान अपने प्रखर राष्ट्रवाद के कारण हिरोशिमा व नागासाकी के बम काण्ड के बाद भी उठकर विश्व की सर्वश्रेष्ठ आर्थिक ताकत बन गया है। अमेरिका युद्ध ‘डल छंजपवद त्पहीज वत ॅतवदह’ के बलबूते पर लड़ा गया था। यह स्वतंत्राता भी हमने ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे पर प्राप्त की थी। पर आज तो कांगे्रस के वर्ष भर का लेखा-जोखा अधर्म, अधार्मिक कृत्यों से भरपूर है। साधु-सन्तों को बाँट कर राजनीति करने की कोशिश की गई। इसी चालाकी भरी राजनीति करने का ही परिणाम था बाबरी ढाँचा ध्वस्त हो गया। संघ परिवार के संगठनों पर पाबन्दी, नेताओं की गिरफ्तारी, कार्यालयों को सील करना, सरकारों की बर्खास्तगी, भाजपा रैलियों पर प्रतिबन्ध, अदालती फैसले जिनसे सरकार के एक के बाद दूसरे कदम को गैरकानूनी साबित करना, राम सीता को भाई-बहन कहना और राजनीति से धर्म को हटाना। बाबरी ढाँचे को फिर से मस्जिद निर्माण की बात करना। डेढ़ सौ से अधिक स्थानों पर मुस्लिम हमलों को हिन्दू-मुस्लिम दंगे का रंग देना। बम्बई में दंगा रोकने वाले पुलिस कर्मियों को दण्डित करना तथा हमलावरों को पुरस्कृत करना। सुनियोजित ढंग से भोपाल, अहमदाबाद, बम्बई में दंगे करवाना, बम्बई के सुनियोजित बस विस्फोट, उसके बाद की कार्यवाही से कांगे्रस के वे राजनेता विद्याचरण शुक्ल के देशद्रोही माफिया गिरोहों से सम्बन्धों का पर्दाफाश, रामास्वामी भ्रष्टाचार सिलसिले में तीन जजों के निष्कर्षों, आरोप सिद्ध हो जाने के बावजूद न्याय पालिका जैसे संवेदनशील मामले में संसद में उन्हें बरी करने का महाभियोग वापस लेने का बेशर्म राजनीतिक निर्णय, फेरा कानून में फँसे पामेला बोर्डेस के साथ चर्चित दलाली के लिये विख्यात चन्द्रास्वामी को अयोध्या में सोमयज्ञ कराने के लिये पूरी सरकार का चेहरा बदलकर उसमें झोंक देना यह काले कारनामे हैं जो कांगे्रस के उद्देश्यों को उजागर करते हैं।
भाजपा को कोई नायक मानता है तो कोई खलनायक। पूर्व में उसकी छवि चरित्रा अभिनेता की थी। किन्तु आने वाला वक्त ही बतायेगा कि भाजपा राष्ट्रीयता की कसौटी पर खरी उतरते हुए इस देश में राम के आदर्श को प्रस्तुत करते हुए जननायक की प्रतिष्ठा पायेगी या नहीं। यह निर्णय आपको देना है।
अब कोई राष्ट्रपति/प्रधानमंत्राी राष्ट्र के नाम दीपावली, महावीर जयन्ती, ईद पर शुभकामना सन्देश नहीं दे सकेगा। किसी हज जाने वाले यात्राी को सुविधा नहीं मिल सकेगी। तीर्थ क्षेत्रों के लिये राज्य व्यवस्था सम्बन्धी प्रबन्ध नहीं कर सकेंगे। दूरदर्शन पर न दीपावली के दीप झिलमिलायेंगे और न होली पर रंगों की फुहार दिखायी जा सकेगी। आपके कौन से उत्सवों पर पाबन्दी लग जायेगी, कौन से त्यौहार मनाने से आप वंचित रह जायेंगे, आप नहीं जान पायेंगे।
कैसे इतने विरोधाभासों/विसंगतियों से परिपूर्ण विधेयक नरसिंहराव ला सके यह आश्चर्यजनक है। बुद्धिमत्ता के भण्डार तथा राजनैतिक चातुर्य से पूर्ण राव क्यों कर इतने मूर्खतापूर्ण कदम उठा सके।
– राम को साम्प्रदायिक बनाने की चेष्टा की जा रही है।
– धारा 30 अनु. धर्मनिरपेक्षता। उर्दू स्कूल, मदरसे, जगमोहन की कश्मीर के मदरसों में पनपते आतंकवाद के विषय में चेतावनी।
– अनु. 44, समान कानून हो आज तक लागू नहीं क्योंकि मुस्लिम मजहब वाले विरोध करते हैं।
– ऐसा प्रस्ताव हो जो संविधान को वास्तव में पंथ निरपेक्ष बनाते हों।
– मस्जिद हमने नहीं तोड़ी थी, राव चाहते तो रोक सकते थे।
– मुसीबत में कोई वर्मा, शर्मा, ठाकुर, अहिरवार ही मदद करेंगे, पड़ोसी ही आयेंगे। बेनजीर भुट्टो, शरद पवार, अर्जुन सिंह आपकी मदद करने नहीं आयेंगे। सर्वाधिक सुरक्षा मुसलमानों को केवल भाजपा शासन में है क्योंकि आपसे विरोध नहीं, सहयोग करती है, विकास के रास्ते खोलती है, समानता के द्वार तक लाती है।
– कांगे्रस मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन (केरल), साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार को क्यों?
– धर्म की पताका उठाये क्या यह भारत के शत्राु नहीं हैं? धर्मद्रोही, आतंकवादी नहीं हैं?
– उग्रवादियों की हजरत बल मस्जिद में पनाह और उन्हें निकालने के लिये हिंसक प्रदर्शन क्या यह जाहिर नहीं करता कि कश्मीर में आतंकवादी तत्व आज भी उतने ही सक्रिय हैं। उग्रवादियों की चिन्ता में पाकिस्तानी बैचेनी क्या खुला सबूत नहीं है कि पाकिस्तान भारत में गड़बड़ी फैलाने को तत्पर है। भारतीय सेना का साहस व संयम था कि इस कठिन परिस्थिति पर काबू किया जा सका। पाकिस्तान की यह मांग कि उग्रवादी सुरक्षित पाकिस्तान सीमा में प्रवेश करें तो हजरत बल छोड़ेंगे, क्या खुली चेतावनी नहीं थी? (इससे रूबिया के अपहरण में जो गलती हुई वह उससे ज्यादा होती।) कैसे?
कश्मीर जंजुओं की शरणस्थली नहीं हो गयी है। मुस्लिम नेताओं की खामोशी हिन्दू साम्प्रदायिकता को जुबान देती है। गोली चलाने हेतु धर्म स्थलों का प्रयोग।
– इस्लामी अदालतों का गठन, आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का यह निर्णय क्या है? देश की अखण्डता पर खतरा दूरगामी परिणामों की चेतावनी इनका विरोध खुलेआम हो तो क्या इस दुष्प्रचार को तोड़ा नहीं जा सकेगा कि भारत से मुसलमानों को कोई लगाव नहीं है?
– बेनजीर भुट्टो के साइप्रस की राजधानी निकोसिया में दिये गये ताजा बयान, तभी हजरतबल को लेकर आपत्तिजनक चिन्ता और संसद में दिये बयान (27.10.93) न केवल गहन चिन्ता का विषय हैं वरन् चेतावनी है। विवादास्पद मुद्दे उठाकर न केवल उसने राष्ट्रमण्डलीय परम्परा का उल्लंघन किया है, भारत विरोधी पर्चे बँटवाकर उन्होंने अपने नेक इरादे स्पष्ट किये हैं। अब भी यदि हम नहीं चेते तो आने वाले कम में केवल पछतावा शेष रहेगा। भारत क्षेत्राीय अखण्डता के बारे में किये गये सवालों को सहन नहीं करेगा। सही किन्तु एक ओर तुष्टीकरण किया जाता रहा तो कैसे उग्रवादियों पर काबू पाया जा सकेगा?
अयोध्या व धर्म के आरोप हम पर लगाये जाते हैं। हम इस पर क्षमायाचना का भाव नहीं रखते। किसने उठाया यह मुद्दा? किसने धर्म विधेयक को संसद में लाकर पुनः आयोध्या का मुद्दा खड़ा किया और अयोध्या मुद्दा इस राष्ट्र का स्थायी मुद्दा तब तक रहेगा जब तक राम मन्दिर बन नहीं जाता। सेकुलरवाद बनाम राष्ट्रवाद की बहस उभरी है। इससे इस देश को तय करना होगा कि इस देश का नागरिक इसकी माटी में गर्व महसूस करे, अपनी संस्कृति से पे्रम करे या तुष्टीकरण की नीतियों पर चलते हुए इस देश को पुनः गुलामी की राह पर चलने को विवश करे। लोकतंत्रा रहे या अधिनायकवाद इस देश में जड़े जमाये।
हिन्दुत्व इस देश का डायनमो है। प्राणवायु है। हिन्दुत्व मर गया तो इस देश की पहचान ही खत्म हो जायेगी। इतने वर्षों की गुलामी सहने और मुस्लिम शासन के बावजूद भी यह देश हिन्दुस्तान कहलाया, किन्तु आज स्वतंत्रा देश के नागरिक अपने आपको हिन्दु कहलाने में शर्म महसूस करने लगे हैं।

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