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ओजस्विनी व्यूज

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कण्डक्टर-यात्री
एक बार शरद जोशी भोपाल सिटी बस में खड़े-खड़े बिना टिकट सफर कर रहे थे। चैकिंग में बेचारे पकड़े गए। चैकर ने उनसे पूछा, ‘आपने इतने स्पष्ट अक्षरों में लिखा यह वाक्य नहीं पढ़ा, बिना टिकट बस में बैठना जुर्म है।’
शरद जोशी धीरे से बोले-‘तभी तो खड़ा हूँ भाई साहब!’
—-
यात्री- भाईसाहब मैं चलती बस से उतरना चाहता हूँ।
कण्डक्टर- ठहरो! जब अस्पताल नजदीक आ जाए तब उतरना।
—-
भीड़ भरी बस में एक कोने से आवाज आयी-‘रबरबैंड में लिपटा किसी का नोटों का बण्डल गिरा है?’
इतना सुनते ही अनेक यात्री अपनी-अपनी सीट से उठकर लपके।
आवाज लगाने वाले ने सीट पर आराम से बैठते हुए कहा, ‘मुझे केवल रबरबैंड मिला है, बण्डल आप खोज लीजिए।’
—-
यात्री (कण्डक्टर से)- ‘साहब, गाड़ी जल्दी से तो नहीं छूटेगी, मैं नाश्ता करके आ जाऊँ?’
कण्डक्टर- ‘अगर आप साथ में मुझे भी ले चलें तो अवश्य ही नहीं छूटेगी।’
—-
सवारी से ठसाठस भरी बस में कण्डक्टर यात्रियों को आगे बढ़ाते हुए-
कण्डक्टर- अरे भाई साहब, थोड़ा खिसकिए।
यात्री- मैं तो पहले से ही खिसका हूँ।
—-
बस-स्थानक की पूछताछ खिड़की पर एक युवक ने पूछा- ‘साहब, नागपुर जाने वाला खटारा डिब्बा कब जाएगा?’ ‘बस कचरा भर जाए फिर रवाना कर देंगे,’ क्लर्क ने नहले पर दहला लगाते हुए जवाब दिया।
—-
एक महिला हड़बड़ाती हुई बस में चढ़ी और खड़े-खड़े सफर करने लगी।
कण्डक्टर- देवी जी बैठ जाइए।
महिला- फुरसत नहीं, मुझे जल्दी घर पहुँचना है।
—-
एक और सवारी बैठाने के उद्देश्य से बस कण्डक्टर ने एक सवारी से कहा, ‘बहन जी, जरा दब कर बैठो।’
‘मैं अपने पति, सास-ससुर किसी से नहीं दबती, तू मुझे दबाने वाला कौन होता है?’ महिला सवारी ने कड़क कर जवाब दिया।
—-
एक बस कण्डक्टर एक यात्री से कह रहा था-‘मैं आपके बारे में सब कुछ जानता हूँ। आपकी भी हाल ही में शादी हुई है और अभी-अभी आप अपनी पत्नी से झगड़ा करके आ रहे हैं और सफदरजंग अस्पताल का टिकट चाहते हैं। ठीक है न!’
उस व्यक्ति ने आश्चर्य से कण्डक्टर की ओर देखते हुए अपना सिर हिला दिया। उसके उतर जाने के बाद बगल वाले यात्री ने कण्डक्टर से पूछा कि, ‘उसे इतनी जानकारी कैसे मिल गई?’
कण्डक्टर ने जवाब दिया-उस व्यक्ति के सिर में पट्टी बंधी हुई थी और पीठ की ओर कमीज पर आटा चिपका हुआ था।
—-
टिकट चेकर- सिर्फ बारह वर्ष से कम के बच्चे ही आधे टिकट पर यात्रा कर सकते हैं, तुम्हारी उम्र क्या है?
लड़का- ग्यारह वर्ष, ग्यारह महीने, उन्तीस दिन और तेइस घण्टे।
टिकट चेकर- बारहवाँ कब पूरा होगा?
लड़का- जब मैं गेट से बाहर निकल जाऊँगा।
—-
एक महिला अपने बच्चे को लेकर बस में चढ़ी। बस चालक ने बच्चे को देखकर बुरा-सा मुँह बनाया और कहा, ‘उफ्…कितना बदसूरत बच्चा है?’
महिला को चालक की बात बहुत बुरी लगी और वह गुस्से में पाँव पटकती हुई बस की सबसे पीछे की सीट पर जा बैठी। वहाँ मौजूद एक युवक ने महिला के गुस्से का कारण पूछा तो वह बोली, ‘बस चालक ने मेरा अपमान किया।’ इस पर युवक ने कहा, ‘तो जाइए उस चालक को जोरदार डाँट लगाकर आइए, तब तक मैं आपका यह बन्दर संभालता हूँ।’
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यात्री (बस में चढ़कर)- लगता है इस बस में सभी जानवर भरे पड़े हैं।
कण्डक्टर- जी हाँ, बस एक गधे की कमी थी वह भी आपने पूरी कर दी।
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बस में यात्रा कर रहा एक मुसाफिर थोड़ी-थोड़ी देर में दांयी जेब से एक घड़ी निकालता और उसे देखकर वापस जेब में रख लेता। फिर बांयी जेब से घड़ी निकालता और उसे देखकर रख देता। पास ही बैठे एक यात्री से जब रहा नहीं गया तो उसने पूछा, ‘क्या, आप कोई वैज्ञानिक अनुसन्धान कर रहे हैं?’
जवाब मिला-नहीं भाई! दरअसल बात यह है कि मेरी एक घड़ी में घण्टे का काँटा नहीं है और एक घड़ी में मिनट का काँटा नहीं है।
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एक महिला ने बस के कण्डक्टर से टिकट के लिए अठन्नी दी। अठन्नी को देखकर कण्डक्टर बोला, ‘यह नहीं चलेगी, खोटी है।’
‘क्या बात करते हो!’ सिक्के का अच्छी तरह निरीक्षण करते हुए महिला बोली, ‘इस पर तो सन् 1928 लिखा है। अगर यह खोटी होती तो इतने वर्षों से अब तक कैसे चलती।’
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बहन जी, आपने आठ वर्ष के इस बालक का टिकट क्यों नहीं लिया? बस कण्डक्टर ने महिला से पूछा।
बस में पन्द्रह किलो वजन ले जाने की छूट है, तो फिर टिकट लेने की क्या जरूरत है? महिला ने तपाक से जवाब दिया।
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एक खूबसूरत महिला खाली बस में अपनी गोद में तीन माह का बच्चा लिए खड़े-खड़े सफर कर रही थी। बस परिचालक ने कहा-देवीजी बैठ जाइए।
मुझे बैठने का वक्त नहीं है। तुरन्त सब्जी मार्केट पहुँचना है, महिला ने जवाब दिया।
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कण्डक्टर (यात्री से)-तुम कहाँ से बैठे हो?
यात्री- मथुरा से।
कण्डक्टर- झूठ बोलते हो, मैंने तुम्हें दिल्ली से चढ़ते देखा है।
यात्री-अरे भाई, चढ़ा मैं दिल्ली से ही था, पर बैठने की जगह मथुरा में मिली है।
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टिकट चैकर ने महिला के साथ बैठे बच्चे को देखा, ‘इसका पूरा टिकट लगेगा क्योंकि यह बारह साल से ज्यादा का है।’
महिला ने कहा-यह कैसे हो सकता है? मेरी शादी को तो अभी ग्यारह साल भी पूरे नहीं हुए हैं।
टिकट चैकर बोला-देखिए देवी जी, मेरा काम टिकट चैक करना है। किसी के निजी जीवन से मुझे क्या मतलब?
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टी.सी.- टिकट दिखाओ।
यात्री- आपको नौकरी करते हुए कितने साल हो गए?
टी.सी.- जी, पाँच साल।
यात्री- तो आपने पाँच साल में अभी तक टिकट नहीं देखा?
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टिकट चैकर- हाँ, भाई साहब आपका टिकट?
यात्री- ले लीजिए दो टिकट।
चैकर- आपके साथ और कौन है?
यात्री- साहब, मैं बिलकुल अकेला हूँ।
चैकर- तो फिर यह दूसरा टिकट किसके लिए है?
यात्री- जी कहीं पहला टिकट खो जाए तो दूसरा काम आ जाएगा और यूँ जुर्माना नहीं होगा।
चैकर- लेकिन अगर दोनों खो जाएँ तो?
यात्री- उसी स्थिति से बचने के लिए मैंने आल रूट पास बनाया हुआ है।
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जज-अभियुक्त
जज- मैं फैसला सुनाने जा रहा हूँ। इस दौरान जो भी व्यक्ति बीच में बोलेगा उसे बाहर निकाल दिया जाएगा।
अपराधी- जज साहब, मैं बीच में बोल रहा हूँ। कृपया मुझे बाहर निकाल दीजिए।
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जज- बड़ी अजीब बात है, तुमने बाॅक्स तो चुराया लेकिन पास में ही रखे नोट को तुमने छुआ तक नहीं।
अपराधी- भगवान के लिए इसका जिक्र मत कीजिए साहब। मेरी पत्नी इस गलती के लिए सप्ताह भर तक मुझसे लड़ती रही।
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अदालत में एक अभियुक्त से वकील ने कहा- गीता पर हाथ रखकर कसम खाओ की जो कहोगे, सच कहोगे और सच के सिवाय कुछ नहीं कहोगे।
अभियुक्त के कसम लेने के बाद वकील ने पूछा- अब झूठ बोलने का नतीजा तो तुम्हें मालूम है न?
जी हाँ, मुकदमा जीत आऊँगा, अभियुक्त ने जवाब दिया।
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अदालत ने एक अपराधी को सजा सुनाई- इसके दोनों कान काट लिए जाएँ।
अपराधी ने सजा सुनी और जोर-जोर से चीखने लगा- नहीं, नहीं मेरे कान मत काटो। मैं अन्धा हो जाऊँगा….।
जज ने आश्चर्य से पूछा-कान कटने से कोई अन्धा कैसे हो सकता है?
अपराधी ने रोते हुए जवाब दिया-जी, मैं चश्मा कहां लगाऊँगा?
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जज- गंगूराम, तुम पर लगाया गया स्कूटर चोरी का आरोप सिद्ध नहीं हो पाया है, इसलिए तुम बाइज्जत बरी किये जाते हो।
गंगूराम- तो जज साहब, क्या स्कूटर अब मेरा हो गया?
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पत्नी ने पति के खिलाफ अदालत में तलाक का मुकादमा दायर किया।
जज ने पत्नी से कहा- तुम्हें तलाक भी मिल सकता है और बराबरी का हिस्सा भी, लेकिन तुम्हारे तीन बच्चों का बँटवारा कैसे होगा?
पत्नी ने झट से पति का हाथ पकड़ा और बोली-चलो जी! हम अगले साल मुकदमा दायर करेंगे।
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जज- जिन लोगों ने तुम पर विश्वास किया, उन्हीं लोगों को धोखा देते तुम्हें शम्र नहीं आई?
अपराधी- पर जज साहब जिन लोगों को मुझ पर विश्वास ही नहीं था, उन्हें मैं धोखा कैसे दे सकता था?
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जज- तुम्हारा वकील कहाँ है?
चोर- जी मेरा कोई वकील नहीं है।
जज- कोई बात नहीं, हम तुम्हें सरकारी वकील दे देते हैं।
चोर- नहीं हुजूर, मुझ पर रहम कीजिए, मुझे कोई वकील नहीं चाहिए।
जज- पर क्यों?
चोर- हुजूर, अपनी चुराई मुर्गियाँ मैं अकेला ही खाना चाहता हूँ।
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अदालत में अपराधी ने मजिस्ट्रेट के सामने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा-मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि भला मैं जालसाजी कैसे कर सकता हूँ? मैं तो अपने हस्ताक्षकर तक नहीं कर सकता।
‘लेकिन तुम पर अपने नहीं, सेठ धनसुखलाल के हस्ताक्षर करने का आरोप है,’ मजिस्टेªट ने स्पष्ट किया।
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मजिस्टेªट (अपराधी से)- तुम्हें रिहा किया जाता है।
अपराधी (गिड़गिड़ाते हुए)- नहीं माई-बाप, मैं बहुत गरीब आदमी हूँ। मेरे पास खाने को नहीं है। मुझे तो जेल ही भेज दिया जाए।
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किसी अपराध के सिलसिले में एक अपराधी को अदालत में पेश किया गया। जब अपराधी अपना बयान दे रहा था, तो जज महोदय उठे-‘तुम बहुत भद्दे ढंग से झूठ बोल रहे हो, अपने लिए कोई वकील क्यों नहीं कर लेते?’
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मजिस्टेªट ने अभियुक्त से पूछा- तुम अपनी सफाई में क्या कहना चाहते हो?
अभियुक्त- जी हुजूर! मैं रोज दातुन करता हूँ, साबुन से मुँह धोता हूँ
जेलर- खेद है कि गलतफहमी की वजह से तुम्हें जेल में एक सप्ताह ज्यादा रखा गया।
कैदी- कोई बात नहीं साहब, इसे मेरे खाते में जमा कर लीजिए, अगली बार की सजा से घटा देना।
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जज (चोर से)- तुम्हें बार-बार अदालत में आते शर्म नहीं आती।
चोर- हुजूर मैं तो कभी-कभी अदालत में आता हूँ पर आप तो रोज आते हो।
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जज- तुम साफ-साफ जवाब दो। तुमने चोरी की है या नहीं?
अपराधी- सरकार, अगर मुझे ही फैसला करना है तो आप अपना अमूल्य समय क्यों नष्ट कर रहे हैं?
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जज- तुम्हें बरी किया जाता है।
अपराधी- हुजूर, चुराया गया माल मैं रख सकता हूँ?
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जज (मुजरिम से)- अपनी पत्नी को पीटने के लिए तुम्हें किसने उकसाया?
मुजरिम- किसी ने नहीं हुजूर! दरअसल बात यह थी कि उसकी पीठ मेरी ओर थी, छड़ी टेबल पर पड़ी थी, चप्पल मैंने निकाल रखी थी और दरवाजा भी खुला था, ऐसा अवसर बार-बार कहाँ मिलता है जज साहब!
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पति- महोदय मेरी बीबी मुझे बेलन से मारती है। मुरूे तलाक दिला दीजिये।
जज- इतनी छोटी-सी बात पर हम तलाक मंजूर नहीं कर सकते। ऐसा होता तो मैंनेहुत पहले ले लिया होता।
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एक महिला को रेल की पटरी पर कट कर आत्महत्या करने के आरोप में जब गिरफ्तार किया गया तो उसके पास ये चीजें बरामद हुईं-एक थर्मस, एक टिफिन, एक उपन्यास।
पुलिस के पूछने पर उसने बताया कि, क्या पता गाड़ी कितनी लेट आती?
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जेल में एक कैदी से मिलने कभी कोई नहीं आता था। जेलर को उस पर बड़ी दया आई। उन्होंने उसे बुलाकर पूछा, ‘क्या बात है? तुम्हारा कोई रिश्तेदार तुमसे मिलने नहीं आता?’
कैदी- हुजूर, वे सभी तो यहीं हैं।
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‘मैं अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता हूँ।’ दुःखी पति ने अदालत में कहा। वह सोने के कमरे में बकरी पालने की जिद पर अड़ी है। शयनकक्ष में इस कदर बदबू फैली हुई है कि अब मैं एक क्षण के लिए भी वहाँ सोने के लिये तैयार नहीं हूँ।
जज ने अपना सिर हिलाया-यह तो सचमुच बुरी बात है। लेकिन क्या तुम ऐसा नहीं कर सकते कि अपने शयनकक्ष की खिड़की खोल दो ताकि कमरे की दुर्गन्ध कम हो सके।
‘क्या?’ पति चीख उठा, ‘अगर मैंने खिड़की खोल दी, तो क्या मेरे सारे कबूतर नहीं उड़ जाएंगे?’

तलाक के मुकदमे के दौरान पत्नी ने बताया, उसके पति ने विवाहित जीवन में उससे मात्र तीन बार बात की है।
जज के पूछे जाने पर पति ने जवाब में कहा, हुजूर मैं चैथे बच्चे का खर्च उठाने में बिलकुल असमर्थ था।
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तलाक के लिए आवेदन देते हुए एक महिला ने अपना दुखड़ा रोया, ‘उन्होंने घर की प्रत्येक प्लेट तोड़ दी और मेरे साथ दुव्र्यवहार किया।’
‘क्या उसने अपने किए पर खेद व्यक्त किया?’ वकील ने पूछा।
‘वह कुछ कह पाता, इससे पहले ही उसे एम्बुलेंस ले गई,’ महिला ने कहा।
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किसी केस के सिलसिले में एक लड़की को अदालत में पेश किया गया। जज साहब ने लड़की से पूछा-क्या तुम्हारी शादी हो गई है?
जी हां, एक लड़के से- लड़की बोली।
यह तो मैं भी जानता हूँ। गुस्से में जज साहब पूछ बैठे- क्या किसी की शादी लड़की से भी हुई है?
जी हाँ, हुई है, मेरे भाई की। शान्ति से लड़की ने उत्तर दिया।
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एक बार एक क्रिकेट कमेण्टेटर अपनी कार स्वयं चलाते हुए जा रहा था। अचानक एक स्कूटर से टक्कर हो गई। अदालत में पेशी होने पर उस कमेण्टेटर ने अपना बयान इन शब्दों में दिया, ‘मैं तो बिलकुल लाइन पर था, स्कूटर आॅफ साइड से अन्दर घुसा। मीडियम पर से आ रहा इनका स्कूटर मेरी कार के मिडिल से टकराया और ये एल.बी.डब्ल्यू हो गए। अब इस दुर्घटना पर सुनिए मेरे वकील से स्पेशल कमेन्टस।’
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एक जैसी हजारों भैंसों में से तुमने अपनी भैंस को कैसे पहचान लिया? अदालत में एक महिला से जिरह करते हुए वकील ने पूछा। महिला बोली, ‘यह कौन से बड़ी बात है। इस कचहरी में काले काले कोट पहने हजारों वकील हैं फिर भी मैं अपने वकील को पहचान रही हूँ।’
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वकील- ठीक-ठीक बताओ। उस अन्धेरी रात में तुमने 500 गज की दूरी पर कार दुर्घटनाग्रस्त होते कैसे देख ली? क्या तुम अंधेरे में भी देख सकते हो?
गवाह- जी हाँ, कई लाख किलोमीटर तक। तारे पृथ्वी से कितनी दूर होंगे?
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तलाक का मुकदमा चल रहा था। जज साहब ने महिला से पूछा, ‘आपने अपने पति को धोखा क्यों दिया?’
हुजूर, धोखा मैंने नहीं, इन्होंने दिया है। कह कर गए थे कि 5 दिन बाद लौटूँगा पर आ गए अगले ही दिन, महिला ने भोलेपन से जवाब दिया।
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तलाक लेने की इच्छुक एक महिला से उसके वकील ने पूछा-कोई ठोस कारण बताइए जिसके आधार पर आपको तलाक दिला सकूँ, जैसे क्या वह जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं, दूसरी औरतों के चक्कर में रहते हैं।
महिला-यही तो सारी मुसीबत है। वह यह सब कुछ नहीं करते। इसी कारण तो मुझे अपनी सहेलियों के बीच बातचीत करने के लिए कोई विषय नहीं मिलता। सोसायटी में मुझे इज्जत नहीं मिलती।
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एक व्यक्ति पर अपराध में सहायता देने का अभियोग लगाया गया। अपराध था-उसकी सास द्वारा आत्महत्या। उसने अपने को निरपराधी कहा।
‘निरपराधी!’ सरकारी वकील चहका।
तुम्हारी सास खिड़की की चैखट पर बैठकर नीचे कूदने की चेष्टा कर रही थी, तब तुम उस कमरे में मौजूद थे और तुमने कुछ नहीं किया।
जी नहीं, मैंने पूरा प्रयत्न किया। जैसे ही वे कूदीं, मैं भागकर अपने से निचले फ्लैट की खिड़की पर उन्हें पकड़ने के लिए पहुँचा, किन्तु वे वहाँ से गुजर चुकी थीं।
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गवाह जब सच बोलने की शपथ ले चुका तो जज ने उससे पूछा, इस शपथ का मतलब तुम जानते हो न?
जी हां हुजूर, गवाह दृढ़ता से बोला, इसका मतलब है कि चाहे मैं झूठ बोलूं या सच, आखिर तक उसी पर डटा रहूँ।

जज- जब तुम्हारी मोटरसायकिल चोरी हुई थी, तभी तुमने रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाई?
व्यक्ति- हुजूर! मैंने सोचा कि मोटरसायकिल की मरम्मत चोर करा ले तभी रिपोर्ट लिखाऊँ।
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जज- तुम दोनों पर आत्महत्या का मुकदमा है।
पे्रमी-पे्रमिका- पर हमने आत्महत्या नहीं, शादी की है।
जज- एक ही बात है।

जज- तुम दोनों तलाक क्यों लेना चाहते हो? तुम्हारी जोड़ी तो लाखों में एक है।
पति- श्रीमान्, हमारी रुचियों में बड़ा फर्क है। मुझे लड़कियों का साथ पसन्द है, तो मेरी पत्नी को लड़कों का।
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कठघरे में खड़े हुए चोर से जज ने कहा-जब मैं वकील था तो तुमने एक मुर्गी चुराई थी। फिर जब मैं सरकारी वकील बना तो तुम एक बकरी चुराने के जुर्म में लाए गए और आज जबकि मैं जज हूँ, तुमने भैंस चुराई है। आखिर ऐसा क्यों है?
हुजूर! यह सब ईश्वर की देन है, चोर ने उत्तर दिया-आपके साथ-साथ मैंने भी तरक्की की है।
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जज- क्या तुम जेब काटना नहीं छोड़ सकते?
कैदी-नहीं।
जज- क्यों?
कैदी- क्योंकि मैं दर्जी हूँ।
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पक्ष का वकील- इस केस में तो केवल बुद्धियों का युद्ध है।
विपक्ष का वकील- अगर यह बात है, तो मैं आपके विरुद्ध केस नहीं लड़ूँगा, क्योंकि मुझे निहत्थे पर वार करने की आदत नहीं है।
—-
जज (कवियों से)- आप लोगों ने इस कवि की पिटाई क्यों की?
एक कवि- जी, कवि सम्मेलन में हम सबने चुराई हुई रचनाएँ ही सुनाईं लेकिन केवल यही एक ऐसा था जिसने अपनी मौलिक रचना सुनाईं
—-
जज (बन्दी से)- मुझे लगता है तुम बार-बार मेरी अदालत में लाए जा रहे हो।
बन्दी- हुजूर, आपको प्रमोशन नहीं होता, इसमें मेरी क्या गलती है?
—-
न्यायाधीश- जब तुम मकान में चोरी कर रहे थे तब मकान मालिक तुमसे कितनी दूर था?
अपराधी- मैं चोरी करने गया था, जमीन नापने के लिए नहीं।
—-

जज व अन्य
एक जज महोदय अपना दाँत निकलवाने के लिए एक दन्त चिकित्सक के यहाँ गए। दाँत निकलवाने से पहले चिकित्सक से बोले-‘तुम इस बात की शपथ लो कि तुम मेरा दाँत निकालोगे, पूरा निकालोगे और दाँत के सिवा कुछ नहीं निकालोगे।’ (मार्च)
—-
एक व्यक्ति को अदालत में पेश किया गया। जज ने पूछा- इस व्यक्ति पर क्या आरोप है? सरकारी वकील ने बताया-मी लार्ड, इसने संगीन अपराध किया है। यह एक लड़की को भगा ले गया था।
गलत, तुरन्त चिल्लाकर अभियुक्त बोला, हुजूर, मैं एक साइकिल चोर हूँ। मैं दरअसल जरा जल्दी कर गया। वह लड़की साइकिल से उतर नहीं पाई थी, तभी…. (मार्च)
—-
तलाक के मुकदमें में जज ने पत्नी से पूछा-क्या तुम्हारे पति ने तुम्हें कभी पीटा भी?
सीधे तौर पर तो नहीं, पत्नी ने कहा। हाँ, यह अकसर दरवाजे को पीटते समय यह कहते थे कि काश! यहाँ तुम होतीं।
—-
अभियुक्त की ओर जज ने घूर कर देखा और पूछा, ‘कैफे में फर्नीचर तोड़ने के बाद तुमने मालिक और दो बैरों को उठा कर पटक दिया, दो ग्राहकों की बाँहें उखाड़ दीं। अब बताओ तुम अपनी सफाई में क्या कहना चाहते हो।’
—-
साहब, जो कुछ भी मैंने किया, वह मेरी कमजोरी के क्षण थे।
—-
जज ने चोर से पूछा- तुम उस घर में क्यों घुसे थे?
चोर ने बड़े नम्र स्वभाव से जवाब दिया- दरवाजे पर ‘स्वागतम्’ लिखा था हूजूर इसलिए।
—-
महिला- वकील महोदय, तलाक किस आधार पर लिया जा सकता है?
वकील- क्या आपकी शादी हो गई है?
महिला- जी हाँ।
वकील- यही काफी हैं
—-

चोर-पुलिस
चोर की सजा पूरी हो रही थी और वो अगले दिन रिहा होने वाला था। उसके एक साथी ने पूछा-‘जेल से छूटकर पहला काम तुम क्या करोगे?’
चोर ने जवाब दिया-‘एक टाॅर्च खरीदूँगा क्योंकि पिछली बार मैंने अंधेरे में बत्ती की बजाए रेडियो का बटन दबा दिया था।’
—-
थानेदार ने फोन पर महिला की आवाज सुनी। वह जल्दी-जल्दी कह रही थी-‘बदमाश मेरे घर में घुस रहे हैं जल्दी आओ।’
‘कहा?’ थानेदार ने पूछा।
‘मेरे घर में।’
‘हाँ-हाँ, पर किस जगह?’
‘वे मेरे दरवाजे तक पहुँच चुके हैं।’
‘यह तो ठीक है, पर हम आपके घर पहुँचेंगे कैसे?’
‘क्यों, आपके पास गाड़ी नहीं है क्या?’
—-
सिपाही- माफ कीजिए, इस तालाब में तैरना कानूनन मना है।
युवती- ओफ, तब तुमने पहले क्यों नहीं कहा, जब मैं कपड़े उतार रही थी।
सिपाही- यहाँ कपड़े उतारने के खिलाफ कोई कानून नहीं है।
—-

पुलिस व अन्य
इंस्पेक्टर- तुमने रास्ते में लड़की का हाथ पकड़ा था, मगर मैंने तुम्हें रिहा कर दिया।
नौजवान- साहब, मेरी इतनी बड़ी बेशरमी पर भी आप मेरे साथ इतना अच्छा सलूक कर रहे हैं।
इंस्पेक्टर- वो तो मेरी बहन थी नहीं तो देख लेता। (फरवरी)
—-
थानेदार- तुझे पता नहीं, इस इलाके में मेरे डर से चोरी नहीं होती?
चोर- जी हुजूर।
थानेदार (गुस्से से)- हुजूर की ऐसी की तैसी।
चोर- हुजूर, मैंने यही सोच कर चोरी की थी।
—-
सिपाही ने एक चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया और फिर गुर्राते हुए उससे कहा-‘तुम यहीं ठहरना, मैं जरा हथकड़ी ले आऊँ।’
नहीं हुजूर! चोर गिड़गिड़ाया, आप भाग जाएँगे और मेरी एक महीने की रोटियाँ मारी जाएँगी।
—-
यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस ने एक कार को रोका। एक मर्द और औरत उसमें बैठे थे। औरत ने बोलना शुरू कर दिया-‘घर से चले थे तभी कहा था, धीरे चलाओ, बहुत ज्यादा भीड़ है। कहती रही अपनी लेन में चलो, ओवरटेक मत करो, विराम रेखा से पीछे रहो, बत्ती देखकर चैराहा पार करो, लेकिन सुनते ही नहीं। मुझे तो बेवकूफ समझते हो।’
चालान की पुस्तिका हाथ में लिए हुए सिपाही ने यह सब सुनकर कार चालक से पूछा-‘यह आपकी क्या लगती हैं?’
‘पत्नी।’
‘तो जाइए, इतनी सजा काफी है।’
—-
थानेदार साहब, क्या मैं उस आदमी से मिल सकता हूँ, जिसे कल आप लोगों ने मेरे घर में घुसते हुए पकड़ा है?
हाँ, मिल सकते हैं, मगर आप उससे मिलना क्यों चाहते हैं? थानेदार ने कहा।
मैं उससे एक बात पूछना चाहता हूँ कि वह किस प्रकार मेरे घर में घुसा कि मेरी पत्नी की आँख न खुली। मैं चाहे कितना भी चुपके से जाऊँ, वह जरूर उठ कर पूछने लगती है, कौन है?
——
जब आपके घर चोरी हुई थी, तब क्या बजा था? पुलिस इंस्पेक्टर ने गृहिणी से पूछा।
जी, दो लाठियाँ बजी थीं। एक मेरे सिर पर और एक मेरे पति के सिर पर, गृहिणी ने गुस्से में कहा।
अरे भाई, घड़ी में क्या बजा था? चिढ़कर इंस्पेक्टर ने पूछा। घड़ी में….गृहिणी सोच में पड़ गई, फिर एकदम याद करके बोली-हाँ, याद आया घड़ी में अलार्म बजा था।
—–
एक महिला ने सड़क के किनारे खड़े पुलिस वाले को पास बुलाकर कहा-‘उस आदमी को पकड़ लो। उसने मेरे कान में कहा कि मैं संसार की सबसे खूबसूरत स्त्री हूँ।’
‘पर पर’, पुलिसवाला हिचक के साथ बोला-उस पर इलजाम क्या लगाऊँगा, झूठ बोलने का या पागलपन का।
—–
आप 80 किलोमीटर प्रति घण्टा की रफ्तार से गाड़ी चला रही थीं, टेªफिक इंस्पेक्टर ने महिला गाड़ी चालक को रोककर कहा।
सच! शोख युवती बोली, और आप जानते नहीं, मुझे अभी तीसरा ही दिन हुआ है गाड़ी चलाते हुए।
—–
चोर की मरम्मत करके उसे बेहोश कर देने पर जब पुलिस इंस्पेक्टर ने एक महिला की तारीफ की तो उसने कहा-इसमें प्रशंसा की क्या बात है? दरअसल चोर के आने पर मैं समझी थी कि इतनी रात गए पप्पू के पिता क्लब से लौटे हैं।
—–
थानेदार- तुमने जितना भी माल चुराया है, सब मेज पर रख दो।
चोर- हुजूर, यह तो नाइंसाफी है। आधा-आधा बाँट लीजिए।
—-
सिपाही- मैंने इसे चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
चोर- नहीं साहब, उस समय मेरे हाथ तो बिलकुल साफ-सुथरे थे।

अन्य
आपकी उँगली बस की खिड़की गिर जाने के कारण दब कर कट गई, इसके लिए आप परिवहन विभाग पर साठ हजार रुपये का दावा तो कर रही हैं परन्तु आप यह कैसे सिद्ध करेंगी कि उँगली की कीमत साठ हजार थी? वकील ने महिला से पूछा।
वकील साहब, आप चिन्ता न करें। मैं तो बहुत कम पैसों का दावा कर रही हूँ दरअसल यही तो वह उँगली थी जिस पर मैं अपने पति को नचाती थी। महिला ने बड़े इत्मिनान से उत्तर दिया।
—–
थानेदार ने सिपाही से कहा-मान लो जंगल में तुम्हारी ड्यूटी लगी है और शेर आ जाए तो तुम क्या करोगे?
सिपाही बोला-साहब मैं क्या करूँगा? जो करना है, वह तो शेर करेगा।
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दो कारें आमने-सामने से टकरा गयीं। टैªफिक पुलिस के सिपाही ने यह पता लगाने के लिए कि गलती किसकी थी, पूछा-पहले कौन से कार टकरायी थी?
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इंस्पेक्टर- आपके पति की मृत्यु कैसे हुई?
महिला- जी, वे भुलक्कड़ थे, शायद साँस लेना भूल गए होंगे।
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थानेदार- हवलदार, इस व्यक्ति को कहाँ से पकड़ लाए हो और क्यों?
हवलदार- जी साहब, कवि सम्मेलन से। आत्महत्या कर रहा था।
थानेदार- लेकिन कवि सम्मेलन सये आत्महत्या का क्या सम्बन्ध?
हवलदार- जी, यह अकेला आठ-दस कवियों के बीच बैठकर अप्रकाशित कविताएँ सुन रहा था।
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एक युवती ने सड़क पर ड्यूटी दे रहे पुलिस के सिपाही के पास जाकर कहा-‘वह बस स्टाप पर खड़ा हुआ युवक मुझे तंग कर रहा है।’
पुलिस वाले ने बिगड़ कर कहा-‘मैं सब देख रहा था मैडम, आप ही उसे देखे जा रही थीं। उसने तो आपकी तरफ एक बार भी नहीं देखा।’
‘तो क्या यह मुझे तंग करने वाली हरकत नहीं है?,’ युवती तनकर बोली।

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